Maharshi Vedvyas Quotes In Hindi वेदव्यास के अनमोल विचार

Maharshi Vedvyas Quotes In Hindi वेदव्यास के अनमोल विचार

Maharshi Vedvyas Quotes In Hindi कई वेदो ग्रंथो तथा महान कटा महाभारत के रचयिता महर्षि व्यास एक विद्वान ऋषि मुनि थे। इस पोस्ट के माधयम से हम उनके महान विचारो को जानेगे जो आज भी हमारे मानव समाज के लिए बहुत अधिक प्रेरणा दायक है Vedvyas Best 30 Quotes In Hindi –

इस जगत में कोई सम्बन्ध नित्य नहीं है : भी अपनी देह का भी नहीं तब स्त्री पुरुष का साथ सदा नहीं रहेगा यह क्या कहने की आवश्यकता है।

मनुष्य के पास धन उतना ही होना चाहिए जितना वो अपना भरण पोषण कर सके जो इससे अधिक एकत्र करता है वह चोर है।

हम अपनी अवहेलना न करे जो आज हमारी निंदा करता है वह स्तुति करने लगेंगे।

प्राणी अकेला जन्मता है अकेला मरता है और अपने पाप पुण्यो का फल अकेला ही अनुभव करता है।

जो जैसा शुभ और अशुभ कर्म करता है अवश्य ही उसका फल भोगता है।

आशा ही दुःख की जननी है और निराश ही परम सुख -शांति देने वाली है।

संसार में ऐसा कोई नहीं हुआ जो मनुष्य की आशा क पेट भर सके।

अधर्मी राजा का अत्र खाने वाले विद्वानों की भी बुद्धि मारी जाती है।

जो अधर्म करते हैं चाहे उसका फल तत्काल न मिले पर धीरे धीरे वह उनकी जार काट डालता है।

पुरुषार्थी मनुष्य सर्वत्र भाग्य के अनुशार प्रतिष्ठा पता है परन्तु जो अकर्मण्य है

वह सम्मान से भस्त होकर घाव पर नमक छिड़कने के समान असह्य दुःख भोगते हैं।

त्याग के बराबर सुख नहीं है

उसी की बुद्धि इस्थिर रह सकती है जिसकी इन्द्रिय उसके बस में है।

मन में संतोष होना स्वर्ग प्राप्ति से भी बढ़कर है। संतोष ही सबसे बड़ा सुख है

संतोष यदि मन में भली भांति प्रतिष्ठित हो जाय उससे बढ़कर संसार में कुछ भी नहीं है।

कृष्ण द्वैपायन Vedvyas के अनमोल वचन

दुसरो के लिए वही चाहो जो तुम अपने लिए चाहते हो।

जो केवल दया से प्रेरित होकर सेवा करते हैं ,उन्हें निः संशय सुख की प्राप्ति होती है।

अहिंसा परम धर्म है। अहिंसा परम तप है अहिंसा परम ज्ञान है अहिंसा परम तप है।

हितकर्ता को अपना संजो अहितकर्ता को पराया।

जो सज्जनो का अतिक्रमण करता है उसकी आयु सम्पति यश धर्म पुण्य आशिस श्रेय ये सब नष्ट हो जाते हैं।

Maharshi Vedvyas Quotes In Hindi

क्षमा ब्रह्मा है क्षमा सत्य है क्षमा भविष्य है क्षमा तप है और क्षमा पवित्रता है

क्षमा ही सम्पूर्ण जगत को धारण कर रखा है।

किसी की मन में क्रोध रखने की अपेक्षा उसे तत्काल प्रकट कर देना अधिक अच्छा है

जैसे पल में जल जाना देर से सुलगने से अच्छा है।

जहां लुटेरों के चंगुल में फास जाने से झूठी सपथ खाने से छुटकारा मिलता हो

वंहा सत्य न बोलकर असत्य बोलना ही उचित है इसी को बिना बिचारे सत्य समझो।

Maharshi Vedvyas जी के बेहतरीन कथन

लोभी मनुष्य की कामना कभी पूरी नहीं होती।

क्रोध से मूढ़ता उत्पन्न होती है मूढ़ता से स्मृति भ्रान्त हो जाती है

स्मृति भ्रान्त होने से बुद्ध की नाश हो जाती है और बुद्धि नष्ट हो जाने से प्राणी स्वान नष्ट हो जाती है।

जैसे बछड़ा हजारो गायों के बीच में अपनी माता को ढूंढ लेता है

उसी प्रकार पहले का किया हुआ कर्म भी करता को पहचानकर उसका अनुसरण करता है।

अभीष्ट फल की प्राप्ति हो या न हो बिद्वान व्यक्ति उसके लिए शोक नहीं करता।

जहाँ कृष्ण हैं वहां धर्म है जहाँ धर्म है वंहा जय है

दुःख को दूर करने की एक ही औषदि है मनो से दुःख की चिंता न करना।

जो दया से प्रेरित होकर सेवा करते हैं उसे निशंसय सुख की प्राप्ति होती है।

अधिक बलवान तो वे होतें हैं जिनके पास बुद्धि बल होता है।

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