Laila Majnu ki prem kahan

लैला-मजनूँ की प्रेम-कहानी – Laila Majnu ki prem kahani

ये कहानी  उस प्राचीन की  प्रेमी  प्रेमिकाओ की है जिसकी कहानी आज भी ज़िंदा है जहाँ भी प्यार का बात आता है है लैला  और मजनू को उदाहरण के रूप ये याद किया जाता है।     

                                                                     सऊदी अरब की एक लड़की थी जिसका नाम था लैला  और यमन का एक लड़का था कैश दोनो  देश एक दूसरे के  सिमा में थे और वो दोनों लैला और कैश  एक दूसरे से बेइंतिहा मोहब्बत करते थे ये कहानी उस समय की है जब प्रेम को  बर्दास्त नहीं किया जाता था ये कहानी  लगभग ग्यारहवीं शताब्दी की है अरब देश के एक अमीर परिवार में इस लड़का का जन्म हुआ जिसका नाम  था कैश  वो शाह अमारी  का बेटा था  जो आगे चलकर मजनू के नाम से जाना गया उसके बारे में कई जयोतिष ने भविस्य बानी की थी की ये लड़का बड़ा होकर किसी लड़की के प्यार में पागल हो जायेगा।  लेकिन उस समय कैश के घरवालों ने ये सब झूठा समझ कर नजर अंदाज़ कर दिया। कहते हैं न की किस्मत का खेल कोई नहीं समझ सकता और प्यार एक ऐसी पहेली है जो अनजान लोगो के बिच गहरा रिस्ता बना देता है ज्योतिशो की बात सच हो गयी    ऐसा ही हुआ।  पागल को अरबी भाषा में मजनू कहते हैं 

                                     जब लैला और मजनू एक मदरसे में पढ़ते थे तब मजनू  को पहली नजर में   लैला से  प्यार हो गया मोलबी ने उसे समझया की वो प्यार की बाते भूल जाये और पढ़ाई में मन लगाए लेकिन प्रेम दीवाने ऐसी बाते कहाँ सुनते हैं मजनू की मोहब्बत का असर लैला पर भी हुआ और दोनों ही प्रेम सागर में डूब गए नतीजा यह हुआ की    ये बात जब लैला के घरवाले को पता चला तब उसके घर वाले उसकी सादी एक अमीर व्यापारी बरद अल्था काफी से करवा दिया जब ये बात का पता मजनू को चला तब वो पागलो की तरह लैला के बियोग में इधर उधर भटकने लगा और दूसरे तरफ लैला भी अपने पति से साफ़ साफ कह दिया की वो मजनू से बहुत प्यार करती है  ये बात सुनते ही उसका पति उसे तलाक दे दिया और वापस उसके पिता के घर छोड़ आया जब मजनू ने लैला को देखा तो उन दोनों ने भागने का फैसला किया और ये बात जब लैला के परिवार को पता चला तब उसके भाईयो ने उन दोनों को मरने के लिए ढूंढने लगा और उन दोनों को मरने का फैशला लिया इसी दौरान लैला मजनू दर बदर  भटकते रहे और भटकते भटकटे राजस्थान की श्री गंगानगर  जिले में प्यास  की कारन उन रेगिस्तान में उन दोनों की मौत हो गया और जब लोगो को उन दोनों के प्रेम कहानी के बारे में पता चला तो लोगो ने उन दोनों को एक साथ दफना दिया। 

                          इस कहनी को आखरी लेकर कुछ और किस्से हैं। कहा जाता है की लैला की शादी जब उस अमीर व्यापरी से हुआ था तो वो आदमी देखने में बहुत ही सुन्दर था जब ये बात मजनू को पता चला तो वह आदिवासी इलाके से भाग गया  तब वह रेगिस्तान के  आसपास के इलाके में आवारा गर्दी करने लगा मजनू के परिवार ने मजनू के वापस आने की आशाएं  छोड़ दी और उसके लिए वो लोग जंगल में ही खाना छोड़कर आ जाते थे। मजनू अपने लैला के याद में मिट्टी पर कभी कभी लैला पर  आधारित  कबिताये  लिखा करता था  कुछ कहानियो में कहा जाता है की उसके शादी के बाद उसके पति के साथ  उसे उत्तरी अरब  भेज दिया गया  और लैला को अपने मजनू के देखे बिना ही उसके प्रेम बियोग में उसकी मृत्यु हो गयी। मजनू को इस बात का पता ६८८ इसा पूर्ब हुआ  इसके बाद लैला के कब्र के पास मजनू ने पत्थरो पर तीन कबिताये लिखी  जो कबिताये इस तरह है। 

“की मैं इस दिवार से गुजरता जाऊंगा जिनसे लैला गुजरती है 

और मैं उस दिवार को चूमा करूँगा  जिसे लैला गुजरती  है।

ये मेरे दिल में दीवारों के प्रति प्यार नहीं है जो मेरे दिल को खुश  करता है 

बल्कि जो उन दीवारों से गुजर कर मेरा ध्यान आकर्षित करती है उससे मुझे प्यार है “

ये है उन दोनों युगल जोड़ी एक प्यार की मिसाल की कहाँनी  एक दर्द भरी प्रेमी प्रेमिकाओ की कहानी इस  कहानी की कुछ अलग अलग किस्से जरूर हैं लेकिन कहानी यह बताते हैं की अगर प्यार हो तो लैला मजनू की तरह  आज भी अगर जब किसी प्रेम की बात आती है तो लैला मजनू को जरूर याद किया जाता है। ऐसी प्रेम कहानी में अक्सर प्रेमी जोरो को सदी करने का मौका नहीं दिया जाता है इनके मौत के बाद दुनिया ने जाना प्यार में कितना सच्चाई है उसके बाद इन दोनों को एक साथ दफनाया गया  ताकि इस दुनिया में न मिल पाने वाले लैला और मजनू एक साथ जन्नत  में जरूर मिले।  दोनों के इस अत्तीत इन महान प्रेमियों  को भारतीय  सेना  ने पूरा सम्मान दिया है  भारत पाकिस्तान सिमा के पास स्थित  बी एस एफ  के एक पोस्ट को मजनू पोस्ट का नाम दिया गया है। भारत पाकिस्तान के सरहद पर श्रीगंगा नगर जिले के बिजौर गांव में इनका मजार बनाया गया है मजार का हिंदी मतलब समादि होता है  ये मजार कहि और नहीं लैला मजनू के कब्र पर बनाया गया है दिन ढलते ही यंहा कौवाली  की धुन बजने लगते हैं  इस मजार पर पुरे दुनिया से युगल प्रेमी यंहा अपना  प्रेमी जोरो  के लिए मन्नत मांगने  आते हैं यंहा हर साल 15 जून को मेला लगता है  जिसमे आने वालो का पूरा यकीं रहता है   फरियाद जरूर कबुल होगी  ये रही उन बेमिसाल प्रेमी प्रेमिकाओ  की कहानी  इस कहानी पर 1976  में फिल्म आयी थी जिसमे ऋषि कपूर मजनू के किरदार  में देखे गए  इस लोगो ने बहुत पसंद किया  ऐसे ही कई महान प्रेमी प्रेमिकाओ की कहानी जैसे रोमियो जूलिएट – हीर राँझा -सरी  फरहाद  जैसे प्रेमी की कहानी देखने को मिलती है। 

तो आपको कैसी लगी ये प्रेम कहानी comment करके जरूर बताये  और हमारे इस वेबसाइट पर दिए हुए और प्रेम कहानि को जरूर पढ़े  धन्यवाद् । 

Heer ranjha story in hindi : हीर राँझा की प्रेम कहानी

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