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poem on mother in hindi

poem on mother in hindi | 40+ माँ पर कविता हिंदी में।

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poetry on mother in hindi

अपनी बनाई हर चीज़ पर तुम अपना हक़ रखना ,
तू चाहे तो मेरी सांसो पे भी अपना पकड़ रखना ,
मैं रहु या न रहु इस जहां में
पर तू मेरी माँ को सलामत रखना।
मैं तुम्हारे तौर तरीके से नबाक़िफ़ हु
फिर भी न जाने क्यों मेरी साड़ी दुआए कबूल होती है ,
तू ये न सोचना की ये तेरा रहमो करम है
ज़डा मेरी माँ की इबादतों की भी खबर रखना।
रोहित नरेंद्र। ….

मैं अपनी हर खुसी माँ से साझा करता हु ,
अपने दर्द तक़लीफो में माँ को याद करता हु
ऐसा नहीं है की ए खुदा मैं तुझे मानता नहीं
पर मैं अपने माँ से ऊपर किसी दर्जे को जानता नहीं।
मैं सबसे ऊपर अपने माँ का दर्जा रखता हु
और इस बात पे मैं गुमान करता हु।
मेरे इस बात से न तू कोढ़न रखना
ज़डा मेरे माँ के जतनो को भी मन्नान रखना।

150+ Best Hindi Kavita

माँ की ममता माँ का प्यार
झूठा है सारा संसार ..
गोद उठाती लोरी गाती
पहले खाना हमे खिलाती
करती पल पल हमे दुलार
माँ की ममता माँ का प्यार
माँ की आँखों के तारे हम
घर के राज़ दुलारे हम
मीठे स्वर में रही पुकार
माँ की ममता माँ का प्यार
दूर नहीं है रहने देती
आँशु नहीं है बहने देती
करे खिलौनों की भरपार्
माँ की ममता माँ का प्यार
कोन है जग में माँ के जैसा
सोना सोना चांदी रुपया पैसा।

poem on mother in hindi (माँ पर कुछ पंक्तियाँ)

ज़माना कहता है मुझे की मंदिर मसिजद जाया कर
वहाँ जाकर खुदा से जन्नत की भीख माँगा कर
मैंने कहा उस ज़माने से ज़न्नत की भूख नहीं है मुझे।
क्योकि मैं कर लेता हु जन्नत का आभास ,अपनी माँ के गोद में शो के।
न जाने कोन सी जादू माँ चलाती है
सर पे हाथ रख वो अपना मेरी चिंता भगाती है।
वो मेरी साड़ी परेशानी को उस पल भूल जाती है
जिस लम्हे ने मुझे हस्ते हुए खुशनुमा पाती है।

जो हर वक्त आस पास रहे वो अक्सर नजर नहीं आता।
माँ के साथ अकसर यही होता है
न जाने वो कब घर के किसी कोने में खो जाती है
वो इतना दिखती है की दिखना बंद हो जाती है
तूने आखड़ी बार उसे आँख भर के कब देखा था
कब उसकी साड़ी या सूट की तारीफ़ की थी
कब उसकी चूड़ियों का रंग नोटिश किया
kab उसकी नेल पॉलिश पर अपनी राय दी
आखड़ी बार कब कहा था माँ जच रही हो
बहुत प्यारी लग रही हो तुम क्या सोचते हो
उसे तुम्हारा कमरा सजाना तुम्हारा
स्वेटर बुनना अच्छा लगता है
माँ भी कभी लड़की थी दोस्त और
दुनिया की हर लड़की की तरह उसे भी
तारीफ़ सुन्ना बहुत अच्छा लगता है
मनोज मुन्तसिर। ….

poem on mother in hindi (एक कविता हर माँ के नाम)

वो माँ है परेशान कितनी भी क्यों न हो
लेकिन वो हर बार सब संभाल लेती है
जो सर पर एक बार हाथ फिर दे न
तो ज़िंदगी आसान सी लगने लगती है
वो माँ है जिसे गिनती नहीं आती सायद
जो एक रोटी मांगो तो हमेसा दो देकर जाती है ,
अगर कभी खाना न खाओ तो फिक्र में
खुद भी भूखा ही सो जाती ही
हां वो माँ है मुझे कोई फिक्र न हो इसीलिए
अपने आँशु छिपाकर मुस्कुरा लेती है
गुस्से में कुछ कह दे तो चुपचाप सुन लेती है
लेकिन मेरी हजारो गलतियों को
बिना कुछ कहे माफ़ कर देती है
वो माँ है उसे नहीं आता है
इंग्लिश बोलना फैसन में रहना
ये खुद को बदलने की कोशिश भी कर लेती है
हां वो माँ है वो बस मेरी ख़ु

love poem in hindi

पूरी की पूरी दुनिया ही बसी हो
जिसकी कोख से हमे जन्म मिला
जिसने चलना सिखाया दौरना
भागना सिखाया पढ़ना लिखना सिखाया
जीने के तौर तरीके सीखाया मतलब की
ज़िंदगी जीना सीखाया मतलब
आज भी अगर कभी घर से बाहर आता हु
तो सबसे पहले मुँह से बस यही निकलता है
माँ मैं आ गया दुनिया के किसी 5 स्टार रेस्टुरेंट में
खाना खा लू एक माँ के हाथ का जो स्वाद है
वो कहि नहीं दिल में बहुत इज्जत है
फिर भी हम दुनिया जहाँ के गुस्सा उनपर निकालते हैं
चीख देते हैं डांट देते हैं बेटा वो एक ऐसी इंसान है
जो खुद भूखा रह लेगी लेकिन तुम्हे
खाना खिलाये बगैर नहीं सोयेगी।
वक़्त रहते उन्हें जितना प्यार और सम्मान
देना है दे दो इंसान एक बार चला जाय
खुदा के पास तो सिर्फ यादे लौट कर आती है
वो इंसान नहीं माँ दूसरी नहीं मिलती एक ही होती है
अनुभव अग्रवाल…

40+ best poem on mother in hindi

जब बैठी हो घर पे माँ तो क्यों पाषाण पूजना
वेवजह यंहा वहां किस वजह से घूमना
मुराद सभी होगी पूरी बस सेवा करो माँ की
पैरो को चूमना तू खुदा है तो दरखास मेरा सुन्ना
की सीखे हर शख्स उस माँ की कदर करना
कुछ और भी चाहे करना एक न करना
माँ का प्यार सबको मिले बस इतना तू करना।

माँ शब्द है माँ है अर्थ माँ के बिना जीवन व्यर्थ
maa आत्मा माँ परमात्मा माँ में बसे पुरे जीवात्मा
माँ जननी माँ जगदम्बा माँ के बिना ये जीवन अचम्भा
माँ परोपकार का ऐसा बृक्ष है जीवन जोत अमृत बृक्ष है।
क्या लिखू तेरे बारे में कोई शब्द नहीं तेरे दायरे में
इस नन्हे से पाँव को तूने सीने से लगाया था
माँ इस मतलबी जहां में तूने जीने की राह बताया था।
वेद कुमार बनर्जी….

poem on mother in hindi

न पूजा करती हु न नवाज़ पढ़ती हु
न किसी सजदे में सर को झुकाया है।
और न ज्ञान है मुझे कुराण का
न गीता को माथे से लगाया है।
बस पूजती हु उस देवी को जिने
मुझे धरती पे लाया है।

10 लाइन की कविता हिंदी में

जो खुदा है उसे खुदा कहता हु
वो मेरे घर में रहता है मैं माँ कहता हु
जो कपडा मुझे छाव देता है धुप से
उसी आँचल को मैं आसमान कहता हु।

महफूज थी तेरी कोख में
माँ जब पता न था की बेटी हु ,
जब आँख खुली इस दुनिया में
तो कचरे के ढेर पे लेटी हु।
पूरी नौ महीने तेरी कोख में माँ
मैंने बाहर आने का इन्तजार किया
ये फेकना ही था तुझको तो तूने
कोख में ही न क्यों मार दिया।
माना तूने मुझे जन्म दिया
माँ तू भी तो एक बेटी है
फिर मैं क्यों इस कचरे में
और तू मखमल पे लेटी है।
क्या पता यंहा मर जाउंगी
या कोई मुझे उठाएगा
भेजेगा कोई स्कूल में पढ़ने या
धंधे पे कोई बिठायेगा
इंच इंच आबरू मेरी बाजार में नोची जायेगी
हवस मिटाएगा वो अपनी
जिसकी बोली ऊँची जायेगी।
महफूज थी तेरी कोख में
माँ जब पता न था की बेटी हु ,
जब आँख खुली इस दुनिया में
तो कचरे के ढेर पे लेटी हु।

poem on mother’s day in hindi

माँ संवेदना है भावना है अहसास है ,
माँ जीवन में फूलो की खुशबू का बॉस है
maa जीवन में रोते हुए बच्चो का खुशनुमा पलना है
माँ मरुअस्थल में नदी या मीठा सा झड़ना है
माँ गीत है लोरी है प्यारी सी थाप है
maa पूजा की थाली है मंत्रो का जाप है
माँ आँखों का सिसकता हुआ किनारा है
माँ गालो पप्पी है ममता की धारा है
maa झुलसते दिनों में कोयल की बोली है।
माँ कुमकुम है सिन्दूर है लोली है
माँ कलम है दवात है स्याही है
maa परमात्मा की स्वंय एक गवाही है
माँ त्याग है तपस्या है सेवा है
माँ फूक से ठंढा किया हुआ कलेवा है ,
maa अनुष्ठान है साधना है जीवन का हवन है
माँ ज़िंदगी के मोहल्ले में आत्मा का भवन है
maa चूड़ी वालो हाथो के मजबूत कंधो का नाम है ,
माँ कासी है कावा है और चारो धाम है ,
maa चिंता है याद है हिचकी है ,
माँ बच्चे की चोट पर सिसकी है ,
माँ चूल्हा धुँआ और हाथो का छाला है
maa ज़िंदगी की करवाहट में अमृत का प्याला है ,
माँ पृथ्वी है जगत है दुरी है
माँ बिना शिष्य की कल्पना अधूरी है ,
maa की ये कथा अनादि है अध्याय नहीं है ,
माँ के जीवन में कोई प्रयाय नहीं है ,
माँ का महत्व दुनिया में कम हो नहीं सकता
maa के के जैसा दुनिया में कुछ हो नहीं सकता।
कवि -ओम व्यास जी…..

प्यारी जग से न्यारी माँ
खुशियां देती साड़ी माँ
चलना हमे सिखाती maa
मंजिल हमे दिखती माँ
सबसे मीठा बोल है माँ
दुनिया में अनमोल है maa
खाना हमे खिलाती माँ
लोरी गा के सुनाती माँ
प्यारी जग से न्यारी maa
खुशियां देती साड़ी माँ

mothers day poem in hindi short

poem on mother in hindi

बचपन की बीती बातों को
मैं भूल कभी न पाती हु ,
प्यार तो बहुत आपसे करता हु माँ
पर इजहार नहीं पाती हु
रूठ जाए खुदा भी पर
आपने न रूठना कभी
टूट जाऊं अगर मैं कभी
पर आपने टूटना kabhi
आपको देखकर ही तो
कुछ करने का हिम्मत कर पाती हु
प्यार तो बहुत आपसे करता हु माँ
पर इजहार नहीं पाती हु

अपनी साड़ी खुशियां हम पर लुटा देती हो
माँ तूम इतना सबकुछ कैसे कर लेती हो
जब जब भी ये तक़दीर दगा देती है
माँ की मुस्कराहट उम्मीद जगा देती है
मेरे हौशले हो उड़ान तुम देती हो
माँ तुम इतना सब कैसे कर लेती हो
दूर जब भी तुमसे होती है माँ
सच कहु तो अकेले में रोती है माँ
मेरी हर खुवाईश तुम पूरी कर देती हो
माँ तुम इतना सब कैसे कर लेती हो
सच की राह पे चलना सिखाया है हमको
जीने का मतलब बताया है हमको
जीने की अनमोल बाते सीखा देती हो
माँ तुम इतना सब कैसे कर लेती हो
मेरे दुखी होने से तकलीफ मुझसे ज्यादा होती है
मेरे ख़ुशी होने से ख़ुशी मुझसे ज्यादा होती है
मुझे ज़रा सी चोट लगने से आँशु बहा देती हो
माँ तुम इतना सब कैसे कर लेती हों आप।

poem on mom in hindi

माँ तो माँ होती है
वो माँ ही है जिसके रहते
ज़िंदगी में कोई गम नहीं होता
दुनिया साथ दे या न दे पर
माँ का प्यार कभी कम नहीं होता।
ये कैसे दिन आ गए हैं यारों
जब हमे बोलना नहीं आता था
तो माँ समझ जाती थी
आज हम हर बात पे कहते है
माँ तुम नहीं समझेगी

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